jatindranath mukherjee biography in hindi - khabarcelebrity-Bollywood,movies,video & photos

Search

Friday, December 14, 2018

jatindranath mukherjee biography in hindi


jatindranath mukherjee biography in hindi
jatindranath mukherjee biography in hindi


ब्रिटिश शासन के ख़िलाफ़ संघर्ष करने वाले महान क्रांतिकारी जतिन्द्रनाथ मुखर्जी का जन्म 7 दिसंबर, 1879 को बंगाल कायाग्राम गांव में हुआ था. एक बच्चे के रूप में जतिन्द्रनाथ मुखर्जी व्यापक रूप से अपनी शारीरिक शक्ति और साहस के लिए जाने जाते थे. जतिन्द्रनाथ मुखर्जी के चरित्र में यह एक और पक्ष है जो कम देखा गया है। जतिन बहुत ही सज्जन और दयालु थे. अपने कॉलेज के वर्षों के दौरान जतिन्द्रनाथ मुखर्जी स्वामी विवेकानंद के संपर्क में आये. स्वामी विवेकानंद ने जतिन्द्रनाथ मुखर्जी की क्षमता का एहसास भविष्य के क्रांतिकारी के रूप में किया और उन्हें कुश्ती कला सीखने के लिए अम्बुगुहा के जिमनैजियम भेजा था.

27 साल की उम्र में अपनी बहादुरी से एक बाघ को मार देने के कारण जतिन्द्रनाथ 'बाघा जतीन' के नाम से भी प्रसिद्ध हो गये थे. जतिन्द्रनाथ ब्रिटिश शासन के विरुद्ध कार्यकारी दार्शनिक क्रान्तिकारी थे. अप्रैल 1908 में बाघा जतिन ने सिलीगुड़ी रेलवे स्टेशन पर तीन अंग्रेजी सैन्य अधिकारियों के साथ एक लड़ाई में उन सभी को अकेले ही पीट दिया। तब से अंग्रेज उनसे थर थर कांपने लगे थे.


1910 में हावड़ा-सिबपुर षड्यंत्र केस की विफलता के बाद जतिन को गिरफ्तार किया गया और फरवरी 1911 में रिहा हुए. जेल से अपनी रिहाई के बाद बाघा जतिन ने राजनीतिक विचारों और विचारधाराओं के एक नए युग की शुरूआत की. वे 'युगान्तर पार्टी' के मुख्य नेता थे और उस समय युगान्तर पार्टी बंगाल में क्रान्तिकारियों का प्रमुख संगठन थी.

ब्रिटिश सरकार और ग्रामीण बाघा जतिन की खोज में थे क्योंकि ब्रिटिश सरकार ने उनकी जानकारी देने वाले को इनाम देने की घोषणा की थी. पांच क्रांतिकारियों जिनके पास माउजर, पिस्टल थी और आधुनिक राइफल से लैस पुलिस और सशस्त्र सेना के बीच 75 मिनट चली मुठभेड़ में अनगिनत ब्रिटिश लोग घायल हो गए और क्रांतिकारियों में चित्ताप्रिया रे चौधरी की मृत्यु हो गई. जतिन गंभीर रूप से घायल हो गए थे. बाघा जतिन को बालासोर अस्पताल ले जाया गया जहां 10 सितम्बर, 1915 को भारत की आज़ादी के इस महान सिपाही ने सदा के लिए आँखें मूँद लीं.