New Breaking News

Post Top Ad google

Your Ad Spot

शुक्रवार, 18 जनवरी 2019

Motivational speech in Hindi। चाणक्य की 7 रणनीति जो आप नहीं जानते

Motivational speech in Hindi। चाणक्य की 7 रणनीति जो आप नहीं जानते
Motivational speech in Hindi। चाणक्य की 7 रणनीति जो आप नहीं जानते
Motivational speech in Hindi। चाणक्य की 7 रणनीति जो आप नहीं जानते


तो चलिए चाणक्य नीति के कुछ नियम जानते है
मैं जीउत राय आज आपके लिए चाणक्य पंडित के 7 strategy (रणनीति) लाया हूं तो चलिए पहले चाणक्य के बारे में कुछ जानते है ।

चाणक्य को कोटिल्या और विस्नुगुप्त के नाम से जाना जाता था। चाणक्य के पिता का नाम चाणक् था इसलिए उनको भी लोग चाणक्य कहते थे।उनके बुद्धि और राजनीति से प्रेरित होकर कई राज्य स्थापित हुए। भारत के जितने भी बड़ी मंत्रिपरिषद है ये सब चाणक्य अकेला संभालते थे और तो और ओ चन्द्रगुप्त मौर्य के प्रधानमंत्री पद पर भी थे।
चाणक्य नालंदा विश्वविद्यालय में प्रोफेसर थे।उसके साथ ही ओ विदेश नीति, राजनीत, प्लानिंग कमीशन और युद्ध शास्त्र बहुत ही अच्छे से जानते थे।अगर आप भी अपनी बुद्धि का विकास चाहते हैं तो इस लेख को अच्छे से पढ़े। चाणक्य समुद्र शास्त्र में भी अग्रणीय थे।अब आप सोच रहे हो कि समुद्र शास्त्र क्या होता है तो बता दू कि अगर आप किसी व्यक्ति से बात कर रहे हो और आप उसके चेहरे को देखा कर उसका सोच को बता सकते हो तो आप भी थोड़े बहुत समुद्र शास्त्र के बारे समझिए कि जानते है लेकिन चाणक्य इसमें बहुत ही माहिर थे और यही महारथ उनको आगे चलकर कई साम्राज्य स्थापित करने में मदद करता था। तो चलिए चाणक्य के बचपन से सुरुआत करते है । इक बार बचपन में ओ घर में ही खेल रहे थे तो इक भभिष्य देखना वाला ज्योतिष आया और ओ चाणक्य के पत्री देख कर बोला कि इस बच्चे के योग में आगे चल कर राज योग लिखा है ये आगे बढ़ कर किसी देश के प्रधानमंत्री भी बान सकता है। मा तो आखिर मा ही होती है ओ सोचने लगी कि अगर ये मंत्री बान गया तो हमे भूल जाएगा उनके मा ने ज्योत्षी से बोली कि क्या सच है तो ज्योतिष ने उसका पुष्टि करने के लिए बोला कि आप अपने बेटे कि दाय और के दांत पर ढेखिए उसपे नगयोग का चित्र है मा ने ढेखा तो सही में चित्र था मा ने चाणक्य से बोली बेटा तू अगर प्रधानमंत्री बन जाता है तो मुझे भूल तो नहीं जाएगा ।ये बात सुन का बालक चाणक्य ने पत्थार उठा कर अपने उस दांत को तोड़ डाला और बोला मा मै तेरे लिए ऐसे लाखों पड़ को त्याग कर दूंगा जो तुझे भूलने पर मजबूर करे।
इससे पता चलता है कि चाणक्य को किसी पद का लालच नहीं था । आगे चल कर चाणक्य तकछिना के प्रधान बने उसी समय सिकंदर पूरी दुनिया को जीतते हुए भारत के तरफ बढ़ रहा था । सोने की चिड़िया भारत को लूटने के लिए  सिकंदर आक्रमण पर आक्रमण कर रहा था। चाणक्य इक अखंड भारत का निर्मण करना चाहते थे और ओ देश के आलग आलाग राजाओं से मिलना चालू कर दिए उस टाईम का जो सबसे बड़ा साम्राज्य मगध साम्राज्य था जब उसके राजा धनानंद के पास चाणक्य गए ।जो घनानंद था ओ जनता से टैक्स वसूल कर के उस पैसे को फालतू के चीजों पर खर्च करता था। चाणक्य जब उसके पास गए तो उसको समझने का प्रयत्न किया और बोले कि राजा का कर्तव्य होता है कि जो पैसा कर के रूप में आ रहा है उसको जनता के भलाई के लिए काम करें इस बात पर घनानंद गुस्से से बोला ये पंडित तुम अपना पदीताय मुझ मत बताओ मुझे राज्य चलना अच्छी तरह से आता है । सिकंदर यहां कभी नहीं पहुंच पाएगा ।लेकिन चाणक्य फिर से उसको समझने का प्रयास किया तब घनानंद ने चाणक्य को धक्का दे दिया चाणक्य नीचे गिर गए और उनका केश खुल गया तब चाणक्य अपने गुस्से को संकल्प में बदल कर घनानंद को बोले कि जब तक मै तेरे साम्राज्य को खतम कर के इक अखंड भारत का निर्मण न कर लू तब तक ये केश नहीं काटूंगा। चाणक्य अब समझ चुके थे कि हमे ही कुछ करना पड़ेगा तब उन्होंने इक बच्चे को ट्रेंड करना चालू किया और उस बच्चे का नाम चंदू था जो आगे चल कर चन्द्रगुप्त मौर्य के नाम से विख्यात हुआ।
1.जो व्यक्ति शास्त्रों के सूत्रों का अभ्यास करके ज्ञान ग्रहण करेगा उसे अत्यंत वैभवशाली कर्तव्य के सिद्धांत ज्ञात होगे। उसे इस बात का पता चलेगा कि किन बातों का अनुशरण करना चाहिए और किनका नहीं। उसे अच्छाई और बुराई का भी ज्ञात होगा और अंततः उसे सर्वोत्तम का भी ज्ञान होगा।
2.उस व्यक्ति ने धरती पर ही स्वर्ग को पा लिया :
a.जिसका पुत्र आज्ञांकारी है,
b.जिसकी पत्नी उसकी इच्छा के अनुरूप व्यव्हार करती है,
c. जिसे अपने धन पर संतोष  है।
3.झूठ बोलना, कठोरता, छल करना, बेवकूफी करना, लालच, अपवित्रता  और निर्दयता ये औरतो के कुछ नैसर्गिक दुर्गुण है।
4.भोजन के योग्य पदार्थ और भोजन करने की क्षमता, सुन्दर स्त्री और उसे भोगने के लिए काम शक्ति, पर्याप्त धनराशी तथा दान देने की भावना - ऐसे संयोगों का होना सामान्य तप का फल नहीं है।
5.ऐसे लोगों से बचे जो आपके मुह पर तो मीठी बातें करते हैं, लेकिन आपके पीठ पीछे आपको बर्बाद करने की योजना बनाते है, ऐसा करने वाले तो उस विष के घड़े के समान है जिसकी उपरी सतह दूध से भरी है।
6.एक बुरे मित्र पर तो कभी विश्वास ना करे। एक अच्छे मित्र पर भी विश्वास ना करें। क्यूंकि यदि ऐसे लोग आपसे रुष्ट होते है तो आप के सभी राज से पर्दा खोल देंगे।
7.मुर्खता दुखदायी है, जवानी भी दुखदायी है,लेकिन इन सबसे कहीं ज्यादा दुखदायी किसी दुसरे के घर जाकर उसका अहसान लेना है।
8.जो माता व् पिता अपने बच्चों को शिक्षा नहीं देते है वो तो बच्चों के शत्रु के सामान हैं। क्योंकि वे विद्याहीन बालक विद्वानों की सभा में वैसे ही तिरस्कृत किये जाते हैं जैसे हंसो की सभा मे बगुले।
9.पत्नी का वियोग होना, आपने ही लोगो से बे-इजजत होना, बचा हुआ ऋण, दुष्ट राजा की सेवा करना, गरीबी एवं दरिद्रों की सभा - ये छह बातें शरीर को बिना अग्नि के ही जला देती हैं।
10.इस दुनिया  मे ऐसा किसका घर है जिस पर कोई कलंक नहीं, वह कौन है जो रोग और दुख से मुक्त है.सदा सुख किसको रहता है?
11.मनुष्य के कुल की ख्याति उसके आचरण से होती है, मनुष्य के बोल चल से उसके देश की ख्याति बढ़ती है, मान सम्मान उसके प्रेम को बढ़ता है, एवं उसके शारीर का गठन उसे भोजन से बढ़ता है.
12.लड़की का बयाह अच्छे खानदान मे करना चाहिए. पुत्र  को अचछी शिक्षा देनी चाहिए, शत्रु को आपत्ति और कष्टों में डालना चाहिए, एवं मित्रों को धर्म कर्म में लगाना चाहिए.
13. एक दुर्जन और एक सर्प मे यह अंतर है की साप तभी डंख मरेगा जब उसकी जान को खतरा हो लेकिन दुर्जन पग पग पर हानि पहुचने की कोशिश करेगा .
14. राजा लोग अपने आस पास अच्छे कुल के लोगो को इसलिए रखते है क्योंकि ऐसे लोग ना आरम्भ मे, ना बीच मे और  ना ही अंत मे साथ छोड़कर जाते है.
15. जब प्रलय का समय आता है तो समुद्र भी अपनी मयारदा छोड़कर किनारों को छोड़ अथवा तोड़ जाते है, लेकिन सज्जन पुरुष प्रलय के सामान भयंकर आपत्ति अवं विपत्ति में भी आपनी मर्यादा नहीं बदलते।
16.मूर्खो के साथ मित्रता नहीं रखनी चाहिए उन्हें त्याग देना ही उचित है, क्योंकि प्रत्यक्ष रूप से वे दो पैरों वाले पशु के सामान हैं,जो अपने  धारदार वचनो से वैसे ही हदय को छलनी करता है जैसे अदृश्य काँटा शारीर में घुसकर छलनी करता है .
17. रूप और यौवन से सम्पन्न तथा कुलीन परिवार में जन्मा लेने पर भी विद्या हीन पुरुष पलाश के फूल के समान है जो सुन्दर तो है लेकिन खुशबु रहित है.
18. कोयल की सुन्दरता उसके गायन मे है. एक स्त्री की सुन्दरता उसके अपने पिरवार के प्रति समर्पण मे है. एक बदसूरत आदमी की सुन्दरता उसके ज्ञान मे है तथा एक तपस्वी की सुन्दरता उसकी क्षमाशीलता मे है.
Thanks for reading.
By jiut ray

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Post Top Ad goggle

Your Ad Spot

My Website Pages